कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Dhat | Krishna Mohan Jha
धत । कृष्णमोहन झा चाय-बिस्कुट-नमकीन धत चुटकुलों और निन्दाओं और नक़ली ठहाको धत होड़ लेती विनम्रताओं और खोखली सुंदरताओं धत राजनीतिक रूप से सही कविताओं और पुरस्कार के लि...
O Chidiya | Aishwarya Tiwari
ओ चिड़िया! । ऐश्वर्या तिवारी ओ चिड़िया आ बैठ खिड़की पे मैं मरीज़ इस दुनियादारी का देखा नहीं है आसमान का रंग अरसे से आ बैठ संग मेरे बता मुझे क्या रंग बटा है ऊपर-ऊपर?...