कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Teddy Bear Main Bache Hue Bhalu | Gyanendrapati
टेडी बियर में बचे हुए भालू। ज्ञानेन्द्रपति बच्चियाँ जब अपने टेडी बियर को छाती से चिपकाए दुलार रही होंगी छीज रहे भारतीय जंगलों में और खोजी दलों और अनुसंधान-स्टेशनो...
Bachcha | Indu Jain
बच्चा । इन्दु जैन औरत के सिर पर गठरी है कमर पर बच्चा मर्द हाथ में बक्सा लटकाये है बच्चा रो रहा है लगातार हाथ-पाँव पटक रहा बार-बार औरत के समझाने मर्द के झुँझलाने के बा...