कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Santulan Ke Liye | Shayak Alok
संतुलन के लिए । शायक आलोक वे जिस दुनिया में आए हैं वह है एक हँसती खिलखिलाती दुनिया। सब सुंदर है, लगे उन्हें इसलिए मैं मुस्कुरा देता हूँ नए बच्चों की तरफ़ आँखें मिचमि...
Koi Mere Saath Chale | Sarveshwar Dayal Saxena
कोई मेरे साथ चले। सर्वेश्वरदयाल सक्सेना मैंने कब कहा कोई मेरे साथ चले चाहा ज़रूर! अक्सर दरख्तों के लिये जूते सिलवा लाया और उनके पास खडा रहा वे अपनी हरीयाली अपने फूल ...