कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Aaj Mujhse Door Duniya | Harivansh Rai Bachchan
आज मुझसे दूर दुनिया । हरिवंशराय बच्चन आज मुझसे दूर दुनिया! भावनाओं से विनिर्मित, कल्पनाओं से सुसज्जित, कर चुकी मेरे हृदय का स्वप्न चकनाचूर दुनिया! आज मुझसे दूर दुनि...
Bhram | Sushma Kumari
भ्रम । सुषमा कुमारी आसमान में अब बादल नहीं दिखता दिखता है बादल के होने का एक भ्रम पेड़ों पर अब चिड़ियाँ नहीं रहती रहता है उनके होने का एक भ्रम। फूर्लों पर अब मधुमक...