कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Angootha Chaap Neta | Kaka Hathrasi
अँगूठा छाप नेता । काका हाथरसी चपरासी या कलर्क जब करना पड़े तलाश। पूछा जाता—क्या पढ़े, कौन क्लास हो पास? कौन क्लास हो पास, विवाहित हो या क्वारे। शामिल रहते हो या मात...
Bitiya Murmu Ke Liye | Nirmala Putul
बिटिया मुर्मू के लिए | निर्मला पुतुल उठो कि अपने अँधेरे के ख़िलाफ़ उठो उठो अपने पीछे चल रही साज़िश के ख़िलाफ़ उठो, कि तुम जहाँ हो वहाँ से उठो जैसे तूफ़ान से बवण्डर ...