कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Paragan | Hemant Deolekar
परागण। हेमंत देवलेकर तितली के होठों में दबे हैं दुनिया के सबसे सुंदर प्रेम पत्र तितली एक उड़ता हुआ फूल है हँसी किसी फूल की उड़कर जाती है एक उदास फूल के पास उड़कर जाता...
Camere Ki Aankh | Kalpana Manorama
कैमरे की आँख । कल्पना मनोरमा कैमरे की आँख होती है शातिर कहते होंगे लोग सच्चे दुख कहाँ पकड़ पाती कैमरे की आँख वह तो खोखली मुस्कान में रह जाती है फँसकर दरअस्ल, कैमरे ...