कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Sabhi Ped Ek Phool Hain | Anurag Tiwari
सभी पेड़ इक फूल हैं। अनुराग तिवारी सभी पेड़ इक फूल हैं जो प्रेम में दिए गए उपहार हैं। जिसे दिया होगा एक प्रेमिका के रूप में पृथ्वी ने हाथ बढ़ा कर अपने प्रेमी आकाश ...
Aisa Bhi Ho Sakta Hai | Balli Singh Cheema
ऐसा भी हो सकता है | बल्ली सिंह चीमा साज़िश में वो ख़ुद शामिल हो, ऐसा भी हो सकता है, मरने वाला ही क़ातिल हो, ऐसा भी हो सकता है । आज तुम्हारी मंज़िल हूँ मैं, मेरी मंज...