कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Barsaati Jhonka | Dharamvir Bharti
बरसाती झोंका | धर्मवीर भारती चूमता आषाढ़ की पहली घटाओं को, झूमता आता मलय का एक झोंका सर्द; छेड़ता मन की मुँदी मासूम कलियों को और ख़ुशबू-सा बिखर जाता हृदय का दर्द!
Sabhi Ped Ek Phool Hain | Anurag Tiwari
सभी पेड़ इक फूल हैं। अनुराग तिवारी सभी पेड़ इक फूल हैं जो प्रेम में दिए गए उपहार हैं। जिसे दिया होगा एक प्रेमिका के रूप में पृथ्वी ने हाथ बढ़ा कर अपने प्रेमी आकाश ...