कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Pita Ka Abhinay Siddhant | Anurag Tiwari
पिता का अभिनय सिद्रांत । अनुराग तिवारी पढ़ाते हुए तमाम अभिनय सिद्धांत गुरु कहते हैं खोजो अपना "मेथड़' मेथड खोजते हुए मैंने खोजा पिता को अपने पिता को! गदोरी में सुरत...
Paragan | Hemant Deolekar
परागण। हेमंत देवलेकर तितली के होठों में दबे हैं दुनिया के सबसे सुंदर प्रेम पत्र तितली एक उड़ता हुआ फूल है हँसी किसी फूल की उड़कर जाती है एक उदास फूल के पास उड़कर जाता...