कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Akoo (Main) | Khairul Anwar
अकू | ख़ैरुल अनवर अनुवाद : जितेंद्र कुमार त्रिपाठी अगर मेरा अंतिम समय आ जाए तो मैं नहीं चाहूँगा कि कोई मुझे दिलासा दे तुम भी नहीं मुझे उन आँसुओं की ज़रूरत नहीं मैं भ...
Barsaati Jhonka | Dharamvir Bharti
बरसाती झोंका | धर्मवीर भारती चूमता आषाढ़ की पहली घटाओं को, झूमता आता मलय का एक झोंका सर्द; छेड़ता मन की मुँदी मासूम कलियों को और ख़ुशबू-सा बिखर जाता हृदय का दर्द!