कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
Nazm | Zeeshan Sahil
नज़्म | ज़ीशाल साहिल ज़िंदगी खो नहीं गई लेकिन ऐसा लगता है दिल के पास बहुत एक बे-नाम सी उदासी है एक बे-वज्ह सा अंधेरा है आग जलती नज़र नहीं आती रात ढलती नज़र नहीं आती रह ...
Yeh Prithvi Kya Kewal Tumhari Hai ? | Gyanendrapati
यह पृथ्वी क्या केवल तुम्हारी है। ज्ञानेन्द्रपति एक शक्तिशाली राष्ट्र के सिरमौर! तुम्हारी उल्लसित कल्पनाओं में पृथ्वी तुम्हारी उँगलियों पर नाचता क्रीड़ा-कंदुक -ठीक वै...