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Dhat | Krishna Mohan Jha
धत । कृष्णमोहन झा चाय-बिस्कुट-नमकीन धत चुटकुलों और निन्दाओं और नक़ली ठहाको धत होड़ लेती विनम्रताओं और खोखली सुंदरताओं धत राजनीतिक रूप से सही कविताओं और पुरस्कार के लि...
O Chidiya | Aishwarya Tiwari
ओ चिड़िया! । ऐश्वर्या तिवारी ओ चिड़िया आ बैठ खिड़की पे मैं मरीज़ इस दुनियादारी का देखा नहीं है आसमान का रंग अरसे से आ बैठ संग मेरे बता मुझे क्या रंग बटा है ऊपर-ऊपर?...
Seedhi Si Baat | Pablo Neruda | Translation - Manglesh Dabral
सीधी सी बात। पाब्लो नेरुदा (अनुवाद: मंगलेश डबराल) शक्ति होती है मौन (पेड़ कहते हैं मुझसे) और गहराई भी (कहती हैं जड़ें) और पवित्रता भी (कहता है अन्न) पेड़ ने कभी नही...
Drishya Aur Bimb | Rajesh Joshi
दृश्य और बिम्ब। राजेश जोशी एक सिनेमा घर के सामने छूटी हुई जगह में एक नए मॉडल की चमचमाती कार एक विकलांग बच्चे को डरा रही है कार धीरे धीरे आगे सरक रही है और डरता, घबरा...
Gh Ra | Arun Kumar Singh
घ र । अरुण कुमार सिंह घर की याद में घर का स्पर्श है शब्दशः घ र घ र घ २ बुदबुदाते हुए शरीर का स्पर्श करता हूँ रेखाएं खोजती रहती हैं रास्ता घर का रेखाएं अंधी हैं घर नह...
Dastak | Gulzar
दस्तक । गुलज़ार सुब्ह सुब्ह इक ख़्वाब की दस्तक पर दरवाज़ा खोला' देखा सरहद के उस पार से कुछ मेहमान आए हैं आँखों से मानूस थे सारे चेहरे सारे सुने सुनाए पाँव धोए, हाथ ...
Shraadh | Ashutosh Sharma
श्राद्ध - आशुतोष शर्मा किसी चींटी को बचपन में कुचला था केंचुए को बीच से काट दिया था मेरा जूता छत से मारे थे चप्पल किसी भिखारी को किसी को कुलटा तो किसी को कहा वेश्या ...
Ek Khwaish | Amrita Sinha
एक ख्वाहिश । अमृता सिन्हा कभी कभी कुछ दूरियाँ अच्छी होती हैं, जैसे आँखों से काजल की दूरी कढ़ाही से करछी की दूरी लेखक की कलम से दूरी रचनाकार की रचनात्मकता से दूरी प्र...
Vismay Tarbooz Ki Tarah | Alok Dhanwa
विस्मय तरबूज की तरह । आलोकधन्वा तब वह ज़्यादा बड़ा दिखाई देने लगा जब मैं उसके किनारों से वापस आया वे स्त्रियाँ अब अधिक दिखाई देती हैं जिन्होंने बचपन में मुझे चूमा ...
Indhan | Gulzar
ईंधन । गुलज़ार छोटे थे, माँ उपले थापा करती थी हम उपलों पर शक्लें गूँधा करते थे आँख लगाकर - कान बनाकर नाक सजाकर - पगड़ी वाला, टोपी वाला मेरा उपला - तेरा उपला - अपने-अ...
Kitabein | Tanwir Sheikh Ilham
किताबें। तनवीर शेख़ 'इल्हाम’ किताबें पढ़ा करों ये तार्किक बनाती हैं तुम्हें और बनाती हैं मार्मिक तुम्हारे विचारों को ताकि तुम अपने अधिकार को अपने कर्तव्य को समझ सक...
Upeksha | Subhadra Kumari Chauhan
उपेक्षा । सुभद्राकुमारी चौहान इस तरह उपेक्षा मेरी, क्यों करते हो मतवाले! आशा के कितने अंकुर, मैंने हैं उर में पाले॥ विश्वास-वारि से उनको, मैंने है सींच बढ़ाए। निर्म...
Mujhe Teen Do Shabd | Agyeya
मुझे तीन दो शब्द । अज्ञेय मुझे तीन दो शब्द कि मैं कविता कह पाऊँ। एक शब्द वह जो न कभी जिह्वा पर लाऊँ, और दूसरा : जिसे कह सकूँ किंतु दर्द मेरे से जो ओछा पड़ता हो। और त...
Gawahi | Adnan Kafeel Darwesh
गवाही। अदनान कफ़ील दरवेश क़ब्र में मेरी बगल में ही लिटाना मेरी कविता को भी जो मेरी दोस्त रही मेरे उन यातना के क्षणों में भी इस तरह हम एक साथ उठेंगे महशर के रोज़ शुभ ...
Kashi Mere Kashi | Aishwarya Tiwari
काशी मेरे काशी । ऐश्वर्या तिवारी मैं निरे शुन्य मैं बैठी वो जब आया था तो शुन्य हुए आया था हर बार कहता था - मैं कुछ नहीं, कोई नहीं मैं। हम मिलते बैठते कई घंटों फिर चल...
Parakhna Mat | Bashir Badr
परखना मत । बशीर बद्र परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना जहाँ दरिया समुंदर से मि...
Kalam | Vishwanath Prasad Tiwari
कलम। विश्वनाथ प्रसाद तिवारी कलम उठाओ इसे इसमें छिपा है देवताओं-अप्सराओं का गान अबोध शिशुओं की मुस्कान यह भर सकती है फूलों में रंग पानी में आग और आग में थोड़ी-सी रोश...
Nayi Nayi Aankhein Hon To | Nida Fazli
नई नई आँखें हों तो । निदा फ़ाज़ली नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर अच्छा लगता है मिलने-जुलने वालों में तो सब ही अपने जैसे है...
Dushwari | Javed Akhtar
दुश्वारी । जावेद अख़्तर मैं भूल जाऊँ तुम्हें अब यही मुनासिब है मगर भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँ कि तुम तो फिर भी हक़ीक़त हो कोई ख़्वाब नहीं यहाँ तो दिल का ये आल...
Hai Daiyya | Nilesh Raghuvanshi
हाय दैया । नीलेश रघुवंशी एक सुंदर ड्राइंगरूम के एक कोने में खड़ी है एक स्त्री मुस्कुराती-सी कजरारी आँखों के संग भौंह को टेढ़ा किए माथे पर लाल टीका उसके नीचे और ऊपर च...