जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना, उन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है।
जिस वक़्त जीना गैर मुमकिन सा लगे, उस वक़्त जीना फर्ज है इंसान का, लाजिम लहर के साथ है तब खेलना, जब हो समुन्द्र पे नशा तूफ़ान का जिस वायु का दीपक बुझना ध्येय हो उस वायु में दीपक जलाना धर्म है।
हो नहीं मंजिल कहीं जिस राह की उस राह चलना चाहिए इंसान को जिस दर्द से सारी उम्र रोते कटे वह दर्द पाना है जरूरी प्यार को जिस चाह का हस्ती मिटाना नाम है उस चाह पर हस्ती मिटाना धर्म है।
आदत पड़ी हो भूल जाने की जिसे हर दम उसी का नाम हो हर सांस पर उसकी खबर में ही सफ़र सारा कटे जो हर नजर से हर तरह हो बेखबर जिस आँख का आखें चुराना काम हो उस आँख से आखें मिलाना धर्म है।
जब हाथ से टूटे न अपनी हथकड़ी तब मांग लो ताकत स्वयम जंजीर से जिस दम न थमती हो नयन सावन झड़ी उस दम हंसी ले लो किसी तस्वीर से जब गीत गाना गुनगुनाना जुर्म हो तब गीत गाना गुनगुनाना धर्म है।