Barsaati Jhonka | Dharamvir Bharti
बरसाती झोंका | धर्मवीर भारती
चूमता आषाढ़ की पहली घटाओं को,
झूमता आता मलय का एक झोंका सर्द;
छेड़ता मन की मुँदी मासूम कलियों को
और ख़ुशबू-सा बिखर जाता हृदय का दर्द!
बरसाती झोंका | धर्मवीर भारती
चूमता आषाढ़ की पहली घटाओं को,
झूमता आता मलय का एक झोंका सर्द;
छेड़ता मन की मुँदी मासूम कलियों को
और ख़ुशबू-सा बिखर जाता हृदय का दर्द!