Daudte Daudte Pyar | Nilesh Raghuvanshi

दौड़ते-दौड़ते प्यार।  नीलेश रघुवंशी 

वह दौड़ रहा है
दिन ब दिन उसकी भागमभाग बढ़ती ही जा रही है
वह जितना दौड़ता जाता है सड़कें उतनी लंबी होती जाती हैं
दिन ब दिन पसरती सड़कें खत्म होने का नाम ही नहीं लेतीं
मैं उसे प्यार करती हूँ और उसकी दौड़ से भयभीत होती हूँ
भय खाती हूँ उसकी दिनचर्या से जिसमें कुछ पल भी नहीं उसके पास
कोसती हूँ बिना पेड़ और बिना छाँव वाले चौराहों और
सड़कों के किनारों को
उकसाते हैं जो उसे और-और दौड़ने के लिए
थकान से उसकी थक जाते हैं कपड़े
पसर जाती है थकान उससे पहले बिस्तर में
नींद में उसकी गोल घुमावदार सड़कें रास्ते जिनमें गुम होते हुए
कसमसाती हैं हमारी दोपहरें उसकी थकी आँखों में
मैं उससे प्यार करती हूँ और प्यार करते-करते शामिल हो गई दौड में
अब हम दोनों दौड रहे हैं
हम बैठे भी नहीं हैं और किसी के साथ खड़े भी नहीं हैं
हम तो बस दौडते जा रहे हैं
दौडते-दौडते हमने हमारी ही इच्छाओं को मार डाला
हाय री दौड़ तूने दौड़ते-दौड़ते भी हमें प्यार न करने दिया
मैं दौड़ से चिढ़ती हूँ लेकिन उससे प्यार करती हूँ
थका हारा सांसारिक प्यार हमारा

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