Dus Se Upar | Sarwat Hussain

दस से ऊपर। सरवत हुसैन

इतने घर
इतने सय्यारे
कंकर पत्थर कौन गिने
दस से ऊपर कौन गिने
औज़ारों के नाम बहुत हैं
हथियारों के दाम बहुत हैं
ऐ सौदागर कौन गिने
दस से ऊपर कौन गिने
ऐ दिल
ऐ बे-कल फ़व्वारे
कितने घाव बने हैं प्यारे
अपने अंदर कौन गिने
दस से ऊपर कौन गिने
कितनी लहरें टूट गई हैं बीच समुंदर कौन गिने


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