Santulan Ke Liye | Shayak Alok
संतुलन के लिए । शायक आलोक
वे जिस दुनिया में आए हैं वह है
एक हँसती खिलखिलाती दुनिया।
सब सुंदर है, लगे उन्हें
इसलिए मैं मुस्कुरा देता हूँ
नए बच्चों की तरफ़
आँखें मिचमिचा देता हूँ।
एक दुख की कथा से
दूसरे दुख के किरदार को मिलता है सहारा
इसलिए मैंने अपवित्र पवित्रताओं को जीवन में उतारा।
दुनिया के सार्वजनिक शोकागार में आँखें नम रखता हूँ
संतुलन के कई पाठ रचे
वे ही रहीं सबसे कम सुंदर स्त्रियाँ
जिन्हें मैं करता रहा दुनिया का सबसे अधिक प्रेम।