Sirf Pyar Karti Hain Titliyan | Jaiprakash Manas

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ । जयप्रकाश मानस

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ

हाँ तितलियाँ
फूलों से लता-वल्लरियों से

अचीन्हे पराए मंजरियों से
कहाँ परवाह

कि झट झर जाएँगे पर
नहीं झंझट

कभी जा पहुँचें नभ पर
तनिक न भय

कि जीवन दो दिना
बस यही सच

प्यार है अर्थ—शब्द जीना
धरा-विस्तार करती हैं तितलियाँ

सिर्फ़ प्यार करती हैं तितलियाँ।


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